यूँ न सब पे उँगलियाँ उठाया करो , खर्च करने से पहले थोड़ा कमाया करो ।
जिंदगी क्या है ख़ुद ही समझ जाओगे , कभी बारिश में पतंगे उड़ाया करो ॥ - राहत इन्दोरी
रोज़ तारों की नुमाइश में खलल पड़ता है , चाँद पागल है, अंधेरे में निकल पड़ता है।
उनकी याद आई है सांसो, ज़रा आहिस्ता चलो , धडकनों से भी इबादत में खलल पड़ता है॥ - रहत इन्दोरी
Sunday, October 26, 2008
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